"रोहित वेमुला के भाई और मा ने हिन्दू धर्म त्यागा " हमारे देश में १४ अप्रैल २०१६ को एक बडी घटना" धर्मांतरण को लेकर घटी है। जिसने २६ सौ साल पहले मनुवादी व्यवस्था की अमानवीयता से उपजे बौद्ध धर्म, इसी मनुवादी व्यवस्था से मुक्ति पाने के लिए जैन पन्थ , सिख पन्थ तथा मुस्लिम और ईसाई धर्म में इस देश का मूलनिवासी आश्रय लेकर कुछ राहत से सम्मान से जीवन जी रहा है। बुद्धिजीवी अब पूरी तरह से आश्वस्त हो रहा है कि कथित"हिन्दू" नाम के इस धर्म में केवल ब्राह्मण ही सुख,सम्रद्धि और सम्मान का हकदार है बाकी लोग केवल अपमान सहते हुए"फील गुड" में जीने को अपना भाग्य और नियति माने ।
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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