सरकारों के द्वारा प्रति यूनिट 5 किलो राशन देना मतलब गरीबों को निर्भर और लाचार भिखारी बनाये रखना है । सरकार क्या जीवन पर्यन्त ऐसा करेगी । यदि करेगी भी तो इस राशन से लोग अपने बाल बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य समृद्धि जैसे विषयों से निजात पा लेंगे ? क्या सरकार या बुद्धजीवी यह नहीं जानता कि राशन आपातकाल के लिए दिया जाता है , अभी कोई आपातकाल नहीं है। ऐसे अतिशेष अनाज का निर्यात कर भारत के राजकोषीय घाटे को कम किया जाय । तथा जनता को स्वाभिमानी आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए रोजगार और नौकरियों का सृजन करने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि हमारे देश का नागरिक आत्मनिर्भर बन सके उसकी क्रय क्षमता बढ़े, निर्भर भिखारी नहीं ! तभी हमारा देश आत्मनिर्भर और सशक्त अर्थव्यवस्था का अग्रणी बन पायेगा।
"निर्भरता से निर्बलता , निर्बलता से "लाचारी" पनपती है , लाचारी से "पिछलग्गूपन" इससे "गुलामी" और गुलामी में "स्वाभिमान" मर जाता है। और मरे स्वाभिमान का व्यक्ति या कौम क्रांति नहीं कर सकती।
-गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन एवं संस्थापक ग्राम गणराज्य पार्टी ।
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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