" एक नज़र इधर भी" आपसी स्वार्थ के चलते खंड खंड होता आदिवासी बोट बैंक, बेअसर होते जा रहे है जनजातीय राजनैतिक दल, अंदरूनी तौर से यह संगठन भी अब खंड खंड हो गया है और बड़ी संख्या में इनके नेता अपनी अपनी पुरानी पार्टियों की तरफ पलायन के मूड में है। कांग्रेस और भाजपा की विचारधारा से इतर सिर्फ और सिर्फ आदिवासियों को शोषणमुक्त और उनके हितों का कल्याणमात्र से जन्मे ये राजनैतिक दल के कार्यकर्ता और छोटे नेता तो पथभृष्ट नही हुए परन्तु इनका नेतृत्व करने बाले भाजपा और कांग्रेस पार्टी के इसारो पर भांगड़ा कर रहे है , इससे व्यथित हो भोले भाले आदिवासी घरवापसी का मन बना रहे है उनका मानना है कि यही सब होना है तो आदिवासियों के नाम पर राजनैतिक रोटियां सिर्फ अपने नेता ही क्यों खाएँ या खाने दे ?……………..* राकेश प्रजापति *  मध्यप्रदेश में छोटे राजनीतिक दलों की भूमिकाओ ने अक्सर राजनीतिक परिणामों पर हमेशा से ही असर डाला है । कई बार सरकार में भी इनकी सम्मानजनक उपस्थिति देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी और इंडियन नेशनल कांग्रेस, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी,भारतीय गोंडवाना पार्टी, जयस जैसे कई दल है जो आगा...