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24 june durgavati balidan divas

मध्यप्रदेष राजय में षासन के द्वारा एैच्छिक एवं सार्वजनिक अवकास धोशित किये जा चुके हैं । इस सत्र में आदिवासी समाज के साथ अन्याय हुआ है । गोंडवाना की महारानी दुर्गावति के नाम पर इस सत्र में छुटटी की घोशणा नहीं किया जाना आदिवासी समुदाय के साथ नाइंसाफी है । अर्थात इसे वर्तमान सरकार द्वारा आदिवासियों की उपेक्षा समझें या आदिवासियों के गौरवषाली इतिहास को मिटाने का शडयंत्र । इसे समझकर आगे हमें क्या करना चाहिए जरा सोचें

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"मरकाम गोत्र के टोटम सम्बन्धी किवदन्ती"

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गोंडी धर्म क्या है

                                          गोंडी धर्म क्या है   गोंडी धर्म क्या है ( यह दूसरे धर्मों से किन मायनों में जुदा है , इसका आदर्श और दर्शन क्या है ) अक्सर इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। कई सवाल सचमुच जिज्ञाशा का पुट लिए होते हैं और कई बार इसे शरारती अंदाज में भी पूछा जाता है, कि गोया तुम्हारा तो कोई धर्मग्रंथ ही नहीं है, इसे कैसे धर्म का नाम देते हो ? तो यह ध्यान आता है कि इसकी तुलना और कसौटी किन्हीं पोथी पर आधारित धर्मों के सदृष्य बिन्दुवार की जाए। सच कहा जाए तो गोंडी एक धर्म से अधिक आदिवासियों के जीने की पद्धति है जिसमें लोक व्यवहार के साथ पारलौकिक आध्यमिकता या आध्यात्म भी जुडा हुआ है। आत्म और परआत्मा या परम आत्म की आराधना लोक जीवन से इतर न होकर लोक और सामाजिक जीवन का ही एक भाग है। धर्म यहॉं अलग से विशेष आयोजित कर्मकांडी...