"क्या जरूरी है शराब की दूकान खोलना"
मप्र सरकार ने प्रदेश में शराब की दुकानों को खोलने के निर्देश जारी कर दिए हैं ऐसी स्थिति में क्या होगा शराब पीने वाले को स्वयं होश में नहीं होने से वह एक दूसरे से जरूर देह संपर्क में रहेगा। क्या ऐसी स्थिति में कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है, नहीं बचेगा । सरकार को इस क्षेत्र में इतनी सतर्कता आवश्यक है । शराब बेचना जरूरी है तो शराब की होम डिलीवरी की भी व्यवस्था की जा सकती है जिसे आवश्यकता है वह उस तक पहुंचा सकता है इसलिए शराब की दुकानें पूर्ण तरह बंद रहे पीने वालों के लिए होम डिलीवरी की व्यवस्था ही सही उपाय हो सकता है । कहीं ऐसा तो नहीं की सरकार को कोरोना से जनता को बचाने से ज्यादा शराब के टेक्स से प्राप्त होने वाले रुपयों की जरूरत ज्यादा है या अज्ञात लालच है । यदि रुपया ही चाहिए तो सरकार केंद्र से मांग करके उस रुपए की पूर्ती कर ले पर लोगों के जान को जोखिम में ना डालें जब प्रदेश में लगातार संक्रमित होने वालों की संख्या बढ़ रही है ऐसे में रुपयों की लालच सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकती है ।
(गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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