9 अगस्त विश्व आदिवासी (इंडीजीनियस)दिवस"
9 अगस्त विश्व के आदिवासियों (इंसान के मूलबीज)की जीवन पद्धति उनकी भाषा धर्म संस्कृति साहित्य और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए वर्तमान सामान्य विकास की दौड़ में वे पीछे ना रह जाएं इस बावद संयुक्त राष्ट्र संघ ने सभी सदस्य देशों को आव्हान किया है कि सदस्य देशों की सभी सरकारें विभिन्न स्तर पर प्रति वर्ष 9 अगस्त को जन सभा का आयोजन कर अपनी सरकार द्वारा आदिवासियों के उत्थान में वर्ष भर किये गये प्रयास की आदिवासियों के समक्ष समीक्षा एवं रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुति देते हुए कर संयुक्त राष्ट्र संघ को प्रेषित करने का दिवस है। यह कोई उत्सव नहीं जो किसी को खुश करना है, बल्कि सरकारें आदिवासियों को खुश करने के लिए स्वयं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करें। हमारे समुदाय की जिम्मेदारी यह है कि 9 अगस्त हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है इसकी जानकारी से सबको अवगत कराते हुए जागरूक करे।
- गुलजार सिंह मरकाम
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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