"आज की जरूरत"
पढ़े लिखे बेरोज़गार युवा रोजगार के अवसर खोजने गांव से शहर की ओर प्रस्थान करें । वहीं शहरों से "रोजगार मुक्त पेंशनधारी" अपने पेतृक गांव की ओर पहुंच कर अपने अनुभव को समाज के बीच रखकर अपनी बुद्धि विवेक विज्ञान के माध्यम से गांव को आर्थिक धार्मिक सांस्कृतिक राजनीतिक विषयों पर समृद्ध करने का प्रयास करें, तो कुछ होना संभव है। - गुलजार सिंह मरकाम (राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांति जनशक्ति पार्टी)
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