'' 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर छोटी सी भेंट'' [संसद ने एैतिहासिक भूल को स्वीकारते हुए वनाधिकार कानून बना दिया ।] *यदि हम इस अधिकार को हासिल नहीं कर सके तो हमसे एैतिहासिक भूल होगी ।* जल जंगल जमीन के संघर्श से जुडे या कानून के जानकार तथा बुद्धिजीवियों को जानकारी है कि अनु0जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासियों के लिये वनधिकार कानून बन गया है । इसके संक्षिप्त इतिहास की ओर जाये ंतो जल जंगल जमीन के संघर्श से जुडे संगठनों लोगों के लगातार दबाव से केंद्र सरकार ने संयुक्त संसदीय दल का गठन कर उसे देष भर की वन भूमि पर काबिज लोगों का सर्वे कराया गया । परिणाम स्वरूप इस कमेटी ने संसद को वनभूमि के काबिजो की स्थिती के बारे में रिपोर्ट दी जिसमें कहा गया कि आजादी के तुरंत बाद मालगुजारों और जमीदारों की भूमि किसानों को वापस की गई थी इसी तरह आजादी के पूर्व से काबिज इन लोगों को जो वन ग्राम में निवास करते हुए वनों के आसपास खाली भूमि पर कास्त कर रहे हैं इनके नाम कर देना चाहिये था लेकिन तत्कालीन सरकारों ने इन्हें कास्त तो करने दिया लेकिन इन्हें उसका मालिक नहीं बनाया । धीरे धी...