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९अगस्त और ८ प्रतिशत भारत के लोग

"९अगस्त और ८ प्रतिशत भारत के लोग" मूलवासी, आदिवासी, इंडीजीनियस, देशज कौन,जनजाति की सूची  में शामिल मात्र 8 प्रतिशत लोग या इसके अतिरिक्त,जनजाति कायदों को जिंदा रखने वाला आसाम,बिहार, अंडमान निकोबार या अन्य राज्य का व्यक्ति जो जनजाति की सूची में ना होकर पिछड़ा वर्ग या अनु-जाति की सूची में शामिल है। प्रश्न पेचीदा है पर हमारी आंख खोलने के लिए काफी है। हमे विश्व आदिवासी/मूलवासी या इंडीजीनियस दिवस पर यूनिटी चाहिए या शब्दजाल में फंसकर बिखराव ? जरा सोचो ! (गुलजार सिंह मरकाम रासंगोंसक्रांआं)

"भारत में फासीवादी राजनीति आरंभ हो चुकी है।"

"भारत में फासीवादी राजनीति आरंभ हो चुकी है।" प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सभी राजनीतिक दलों को ईवीएम के माध्यम से भयभीत कर दिया है,कुछ विपक्षी दल के सांसदों को मोदी और शाह की टीम ने प्रायोजित तरीके से जितवाया है और हरवाया भी है, जिसमें ईवीएम का रोल महत्वपूर्ण रहा है देश के सभी विपक्षी राजनीतिक दल अपने आप को कमजोर महसूस कर रहे हैं अब उनके नेता मोदी की कृपा से जीतने के लिए मोदी के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहे हैं यदि ज्यादा बोला तो जांच बैठा दी जाती है यह सीधा सीधा दबाव और आतंक की राजनीति है जिसमें सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर साथ ही सामाजिक संगठनों का साथ लेकर मोदी के इस आतंक को रोकना होगा अन्यथा भय और आतंक इतना बढ़ जाएगा की सरकार कुछ भी करें उसके खिलाफ कोई भी नहीं बोल पाएगा अंततः इस देश में आर एस एस की कल्पना को एकात्म राष्ट्रवाद या जिसे फासीवाद भी कहा जा सकता है के माध्यम से देश का शासन चलने लगेगा तब फासीवाद का कोई विरोधी नहीं होगा सिर्फ फासीवाद के आसरे पर उनके इशारों पर चलने वाला ही खड़ा हो सकता है आंदोलनकारियों को या तो जेल या तो माबलिंचिग के माध्यम से हटा दिया जाएगा यही है फ...

"9 अगस्त आदिवासियों के विकास की समीक्षा का दिवस है"

"9 अगस्त आदिवासियों के विकास की समीक्षा का दिवस है" 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर यदि हम जिस भी स्तर, राज्य/ जिला/विकास खण्ड या ग्राम स्तर पर समारोह का आयोजन कर रहे हैं, ऐसे मौके पर उस स्तर के प्रशासनिक अधिकारी को उपस्थित रहने के लिए आयोजन समिति के द्वारा पत्र लिखकर आमंत्रित करें ताकि उस स्तर पर जनजातियों की अब तक हुए विकास तथा  किए गए प्रशासनिक प्रयास की समीक्षा हो सके। राज्य स्तर पर प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण विभाग जिला स्तर पर सहायक आयुक्त तथा विकासखंड स्तर पर विकासखंड अधिकारी तथा ग्राम स्तर पर पंचायत के सचिव को आमंत्रित करें । ताकि वह आदिवासियों के हित में अब तक किए गए प्रयासों की रिपोर्ट तैयार करके समारोह में उपस्थित हो तथा सबके सामने उस रिपोर्ट का वाचन करें। साथ ही जनता द्वारा आदिवासी हित में लिए गए निर्णयों के प्रस्ताव पर स्वयं के भी हस्ताक्षर सहित उच्च एजेंसी को अग्रेषित करे। यही सार्थकता है विश्व आदवासी दिवस मनाए जाने की ! (गुलजार सिंह मरकाम रासंगोंसक्रांआं)

आदिवासी सामंजस्य का प्रतीक है।

हमारे विचार अलग पर आज जिसकी सत्ता है उससे संघर्ष कर अपनी बात को मनवाना है तो हमारी ताकत को उनके द्वारा किए घोषणा को मनवाने के लिए धरातल पर उतरना होगा। ५ साल तक हमारी लड़ाई का तरीका यही होना चाहिए। यदि कोई सरकार इस पर अमल करती है तो हम उसको धनवाद करेंगे ।यदि नहीं करते तो ५ th अनुसूची छेत्र में पंचायत चुनाव को रोकने का काम या बहिष्कार करेंगे। फिर परिणाम जो भी हो। जनचेतना,सबसे बड़ा हथियार है। (गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संजोयक gska)

स्त्री शूद्रो न धीयताम

"स्त्री शूद्रो न धीय्ताम" हवाई यात्रा में हाई प्रोफाइल लोग चलते हैं इसलिए वहां एयर होस्टेज कुंवारी और सुंदर लड़कियों की भर्ती की जाती है जहां योग्यता में मानक सुंदरता को प्राथमिकता है ,प्राइवेट सेक्टर के किसी भी संस्था में खूबसूरत जवान लड़कियों को रिसेप्शनिस्ट बनाया जाता हैं बीयर बार से लेकर हर जगह (शासकीय दफ्तरों/संस्थाओं) को अपवाद स्वरूप छोड़ दी जाए तो वहां भी यही काम होता है यह किस मानसिकता का परिचायक है, क्या यह स्त्री और पुरुष के बीच भेदभाव का उदाहरण नहीं । इसकी नींव मनुस्मृति काल से डाली गई है जिसे कोई भी हटाना नहीं चाहता।इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस की आवश्यकता है। (गुलजार सिंह मरकाम रासंगोंसक्रांआं)

"भारत का भविष्य आपके कंधों पर है

"भारत का भविष्य आपके कंधों पर है सेना पुलिस होमगार्ड और अर्धसैनिक बल में तैनात मूलवासी/मूलनिवासी क्या मुट्ठीभर शोषकों के विरूद्ध बगावत नहीं कर सकते ? जब आपने अंग्रेजों के विरूद्ध बगावत की है तो शोषकों के विरूद्ध भी बगावत करना होगा।अन्यथा अनुशासन,राष्ट्रवाद और आदेश का वास्ता देकर सत्ताधारी तुम्हारी गोली से तुम्हारे मां बाप भाई बहन खानदान को भुनवाने में कोई कसर नहीं छोडेगा/कसर नहीं छोड़ रहा है। जिस तरह अंग्रेजों से बगावत कर देश को आजाद कराया है उसी तरह इन अन्यायी अत्याचारी शोषक सत्ताशीशों से देश और देश की आम जनता को मुक्त कराओ। अब सिर से ऊपर पानी आ चुका है। देश की जनता के साथ आपको भी डूब जाना है,शोषक अपना आशियाना विदेशों में बना चुका है। पानी जहाज या हवाई जहाज से फुर्र से उड़ जायेगा।आपको गृहयुद्ध के चक्रव्यूह में फंसाकर। (गुलजार सिंह मरकाम रासंगोंसक्रांआं)

आदिवासी उपयोजना और आदिवासी विकास

आदिवासी उपयोजना "टीएसपी (आदिवासी उपयोजना) का पैसा प्रचार प्रसार के लिए नहीं बल्कि आदिवासियों के उत्थान के लिए है" केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का काम यह है कि केंद्र सरकार के द्वारा विभिन्न विभागों के क्रियाकलाप और उनके प्रचार एवं प्रसार के लिए अपने मद से राशि आवंटित करना, परंतु मध्य प्रदेश सरकार की कम अकली कहै या अज्ञानता जिसमें आदिवासी विभाग के अंतर्गत आने वाले वनाधिकार अधिनियम के प्रचार प्रसार के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा प्रस्ताव भेजा जा रहा है जो कि सरासर गलत है यह प्रपोजल वनाधिकार के संबंध में प्रचार प्रसार के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश की ओर से जाना चाहिए परंतु यह प्रपोजल आदिम जाति कल्याण विभाग मध्यप्रदेश के द्वारा भेजा जाना यानी टीएसपी के पैसे से ही प्रचार प्रसार किया जाएगा जबकि टीएसपी का पैसा वनों में काबिज आदिवासियों के समग्र उत्थान के लिए आवंटित होता है इसलिए आप सभी से अनुरोध है की टीएसपी के पैसे से प्रचार-प्रसार नहीं वरन् वनाधिकार से संबंधित वर्गों के उत्थान के लिए जिसमें उनके व्यवस्थापन, शिक्षा चिकित्सा ,रोजगार बिजली आदि के लिए किया ...