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"आन्दोलन और पूर्णकालिक कार्यकर्ता"


आज के दौर में किसी आन्दोलन को सफल बनाने के लिये उस संगठन की प्रत्येक शाखाओं में कुछ पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं का होना अनिवार्य है । चाहे वह सामाजिक, आथिक ,राजनैतिक,धार्मिक शाखा हो । आदिवासियों के आन्दोलन को आज गिने चुने लोग जो कि व्यवसायिक, परिवारिक क्रियाकलापों के साथ कुछ ही समय दे पाते हैं । फिर भी किसी तरह आन्दोलन आगे बढ रहे हैं,जो लक्ष्य प्राप्ति के लिये नाकाफी हैं । कारण कि यदि व्यवसायिक, पारिवारिक जिम्मेदारी बढी तो आन्दोलन पर उसका असर पडता है, उसकी गति धीमी होती है । कभी कभी देखने में आता है कि कोई पारिवारिक या व्यवसायिक जिम्मेदारी वाला व्यक्ति आन्दोलन में कुछ अधिक समय या धन खर्च करता है तो वह आन्दोलन को लीक से हटकर अपने तरीके से चलाने का प्रयास करता है, जो आन्दोलन के लिये नुकसानदायक है । यदि पूर्णकालिक कार्यकर्ता होगा तो उसे कोई लोभ् लालच या पारिवारिक, व्यवसायिक जिम्मेदारी प्रभावित नहीं कर सकेगी । आज जितने भी बडे या केडर बेस संगठन परिणाम तक पहुंच रहे हैं उनका आधार पूर्णकालिक कार्यकर्ता है । हमें इस तरह के पूर्णकालिक कार्यकर्ता की खोज कर उन्हें पूरी तरह सामाजिक संरक्षण देकर समाज का नेतृत्व सोंप सकते हैं ।

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