भारत देश की आजादी 1947 के बाद अनुसूचित जनजाति छेत्र यानी पांचवीं, छठवीं अनुसूची क्षेत्रों में आकर बसे विदेशी शरणार्थी हैं ऐसे लोग इन क्षेत्रों में केवल व्यापार करके लाभ कमा कर अपने मूल स्थान में वापस जा सकते हैं परंतु यहां पर से स्थाई संपत्ति अर्जित नहीं कर सकते ना ही स्थाई निवास कर सकते। ऐसे लोगों के व्यवस्थापन की समस्या भारत सरकार की है ना कि जिसके मूल निवासी आदिवासी की है इसलिए इसी संदर्भ में मंडला डिंडोरी सहित अनेक क्षेत्रों में सिंधी शरणार्थी आकर अवैध रूप से बस हुए हैं ऐसे लोगों की स्थाई संपति जप्त की जाए उन्हें केवल व्यापार करने की अनुभूति के तहत व्यपार करके लाभ कमा के उन्हें जो भारत सरकार में शरणार्थी कैंप बना कर दिए हैं वहां पर निवास करें पांचवे सूची शेत्र में स्थाई निवास का कोई भी पट्टा या रजिस्ट्री पूरी तरह अवैध है ग्रामगण राज्य पार्टी इस विषय पर संवैधानिक तरीके से आंदोलन करके ऐसी कृत्य का विरोध करेगी। गुलजार सिंह मरकाम (gska)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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