"पांचवी अनुसूची बनाम पेसा कानून"
संविधान में लिखित पांचवी अनुसूची आदिवासी को पूर्ण स्वायत्तता के लिए स्थापित की गई थी परंतु उसे कमजोर करते हुए अनुसूचित क्षेत्रों में गैर आदिवासी को संतुष्ट करने उनके वोट बैंक को हासिल करने के लिए सत्तारूढ़ मनुवादी पार्टियों ने पेशा कानून के रूप में पांचवी अनुसूची की अनुपूर्ति के उद्देश्य पेसा एक्ट लाया जो आदिवासियों के अधिकारों को सीमित करके गैर आदिवासियों की दखल को मान्यता देता है। पंचायती राज नगर परिषद नगर पालिका का अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में प्रवेश इसका सीधा उदाहरण है।
गुलजार सिंह मरकाम(Gska)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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