भाषा, धर्म, संस्कृति आदिवासी अस्तित्व को बचाने का मामला है।, इसलिए किसी समुदाय का विकास उसकी एकता और ताकत पर निर्भर है,वह ताकत उसके स्व अस्तित्व के पहचान पर बनती है। इसलिए मेरा मानना है "भाषा,धर्म, संस्कृति की (डेहरी) दहलीज पार किए किये बिना किसी तरह के विकास की आशा बेमानी होगी"
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