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"दबाव और प्रभाव"

"दबाव और प्रभाव"
मध्यप्रदेश में आदिवासी हुंकार यात्रा की जानकारी अब लोगों तक पहुंचने लगी है। जिन लोगों को पांचवी अनुसूची पेसा कानून वनाधिकार  से संबंधित अधिकारों की समझ है , विस्थापन और पलायन के दंश को समझते हैं, ऐसे लोग व संगठन स्वस्फूर्त चेतना के साथ आंदोलन को सफल बनाने में दिन रात लगे हुए है साथ ही जिन लोगों को जानकारी नहीं है उन्हें लगातार मीटिंग के माध्यम से बताने का प्रयास कर रहे है। प्रदेश में यह पहला मौका है जब पूरे प्रदेश के चारों ओर से लोग हैं, सुप्रीकोर्ट में लंबित वनाधिकार के निर्णय का पूर्वानुमान लगाते हुए जनविरोधी परिणाम के विरूद्ध अपनी ताकत का एहसास कराने को तैयार हैं। साथियों,जनता के अधिकारों के विरुद्ध यदि कोई सरकार हो या सुप्रीकोर्ट ही क्यों ना हो विपरीत निर्णय देने की मंशा रखेगी तो उसका भी विरोध करने का अधिकार जनता को है, आखिर सुप्रीकोर्ट के बाद कहां जाया जा सकता है ।जनता के हित को यदि कोई कानून या निर्णय प्रभावित करता है तो जनता उसे अपनी एकता और ताकत से बदलवा सकती है। कारण है कि "जनता की सुविधा के लिए कानून है ना कि कानून के लिए जनता है"
निवेदक- जल जंगल जमीन जीवन बचाओ साझा मंच मप्र
प्रस्तुति-गुलजार सिंह मरकाम (रासगोंसक्राआ)

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