"चोरी का मंदिर"
पहरेदार बनाकर रखा था जिसे तिजोरी का ।
सुनो गोंडवाना के आदिवासीयो,
वही पहरेदार ही चोरों का असली सरदार निकला ।।
सरना और कचारगढ की मिट्टी चुराकर राम मंदिर को ऐतिहासिक बनाने वाले यह जानते हैं कि ऐसा करने से आदिवासियों की आस्था राम से जुडेगी, परन्तु ऐसे चोरों को यह भी याद रख लेना चाहिए कि आदिवासी समुदाय चोरी पसंद नहीं करता, इसलिए अब आदिवासी समुदाय इस राम मंदिर को धन धरती के साथ साथ आस्था और विश्वास की चोरी और डकैती से बने मंदिर के रूप में जानेगा। तथा अपनी आने वाली पीढ़ी को भी यही सीख देगा ।
-गुलज़ार सिंह मरकाम
(राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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