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लालच देकर नहीं स्वावलंबी समालंबी समाज का निर्माण करोबी

 "लालच देकर गुलाम नहीं स्वावलंबी समाज का निर्माण करो !"

अपनी साख बढ़ाने के लिए सरकारी खजाने से लुटा दो जनता की गाढ़ी कमाई । दिखावा के लिए राशन, मकान फ्री बिजली,सायकिल,लेपटाप, गहने अब स्कूटी,भविष्य में जनता को जनता के टेक्स और जनता के जल,जंगल,जमीन से दोहन की गई खनिज और संसाधन से जमा सरकारी खजाने को अप्रत्यक्ष रूप से बड़े बड़े पूंजीपति, उद्योगपति और बिचोलियों की उत्पाद राशन(जमाखोर), मकान(सीमेंट, लोहा गिट्टी रेत माफिया) फ्री बिजली,(अडानी, अंबानी रिलायंस)सायकिल, (सायकिल,स्कूटी उद्योगपति) मोबाइल,लेपटाप,(इलेक्ट्रॉनिक उद्योगपति) गहने (बड़े ज्वेलर)अब स्कूटी, इन उद्योगपतियों से कितना पर्सेंट हिस्सा लेकर टेंडर पास करके लाभ दिलाने का वचन दिया है,जवाब तो देना पडेगा! जनता अब धीरे धीरे समझने लगी है कि ये लालच देकर किसकी जेब काट रहे हो । अपने बाप की कमाई का धन इसी तरह लुटाते हो क्या ? यदि इतने दरियादिल होते तो, तुम हजारों एकड के जमींदार नहीं होते, अरबों की संपत्ति स्विस बैंक में जमा नहीं रहते, करोड़ों रूपये तुम्हारे बिस्तर और लेट्रिंग में छिपे नहीं होते। अब भी वक्त है ,देश को पूंजीपतियों से मुक्त कराओ,लालच देकर नहीं व्यवस्था परिवर्तन करके , सुंदर,स्वस्थ, समृद्ध समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करो। 

-गुलजार सिंह मरकाम (राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)

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