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तीसरी आजादी की जंग

 " तीसरी आजादी की जंग"

देश में आजादी का एक बिगुल बजाना चाहिए।

पूंजीवाद और तानाशाही के विरुद्ध अब जंग होना चाहिए।

बुद्धि, विवेक ,विज्ञान का दुश्मन धर्मांधता अतिवाद है,

मानवता के खातिर इसका परदा उठाना चाहिए।।

जल जंगल जमीन का मालिक , आखिर क्यों लाचार है,

मालिकक को मालिक होने का ,

एहसास कराना चाहिए।।

देश की धन दौलत को लूटें,

चोर लुटेरे गद्दार हैं,

इनको फांसी पर लटकायें,

यही उचित और न्याय है।।

बहुत मांग ली अब ना मांगो,

ये सारे गद्दार है।

ऐसे तानाशाहों के लिए अब,

हाथ में तलवार होना चाहिए।।

बहुत हो चुका रोना धोना

अब रोने का वक्त नहीं,

सत्ता शासन के लिए अब तो, 

"स्वशासन" का हुंकार होना चाहिए।।     ( गुलजार सिंह मरकाम)

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