"ऐसे मामले जनता की अदालत में निपटाए जायें"
अर्णव गोस्वामी जैसे पक्षपाती पत्रकारों पर देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए या देश हित में बीच चौराहे पर गोली मारी देना चाहिए। और उन मूर्ख संतों की पालघर कांड पर उस गांव को जलाकर राख कर देने की धमकी के लिए भी सुप्रीम कोर्ट संज्ञान नहीं लेता है तो जनता की अदालत उन्हें सरेआम सजा दे। ऐसी विषम परिस्थितियों में जहां संयम की जरूरत है। गोदी मीडिया और मनुवादी साधुओं के बयान देश को शर्मशार करने वाले हैं।इस पर भी सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्था का व्यवहार भी पूरी तरह "गोदी न्याय और गोद लिये दत्तक न्यायधीश" की तरह अविश्वसनीय और संदिग्ध दिखाई दे रहे हैं। जनता इन्हें भी जन अदालत में सरेआम सजा दे।
(गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन शशि)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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