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"विश्वास और भक्ति"

अंध भक्ति या अन्धविश्वास जीवित व्यक्ति पर कभी नहीं करें, जीवित इंसान कभी भी धोखा दे सकता है, कभी भी बिक सकता है,भय या दबाव में आपको क्षति पहुंचा सकता है।

  यदि अंधभक्त या अन्धविश्वासी बनना ही है तो, शहीद हो चुके महापुरुषों, अपने पेन,पुरखों के बनो, यदि उनकी अंधभक्ति से आपको लाभ नहीं भी मिला तो उनसे नुकसान की संभावना शून्य होगी, क्योंकि वे धोखा नहीं देंगे,,ना ही बिकेंगे, उन पर कोई भय या दबाव बनाकर आपको क्षति नहीं पहुंचा सकते ।

-गुलजार सिंह मरकाम (GSKA)


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