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"जनता का टेक्स से भरा खजाना और जनता पर ही एहसान जताना"

 "जनता का टेक्स से भरा खजाना और जनता पर ही एहसान जताना"

भारत भूमि में जितने खनिज,वन और जल संसाधन हैं,इनसे प्राप्त राजस्व तथा आम नागरिक से प्राप्त टेक्स से हमारे देश का खजाना भरता है, देश प्रदेश की किसी की भी पार्टी की सरकार बने , ये जो रेवड़ी बांटने का काम हो रहा है क्या पार्टियां अपने पार्टी फंड से देती है, कतई नहीं ये सब जनता के खून पसीने की राशि है, इसलिए पार्टी और सरकारें इनका एहसान जनता के ऊपर लादने की बात करती है,जो सरासर बेईमानी है, इसे गहराई से, समझें और पार्टियों की घोषणा और संकल्प से प्रभावित न हों बल्कि सरकार से प्रश्न करें कि केंद्र और राज्य सरकारें इतने वर्षों तक क्या कर रही थी जो अब देने की बात कर रही हैं। -गुलजार सिंह मरकाम 


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"मरकाम गोत्र के टोटम सम्बन्धी किवदन्ती"

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गोंडी धर्म क्या है

                                          गोंडी धर्म क्या है   गोंडी धर्म क्या है ( यह दूसरे धर्मों से किन मायनों में जुदा है , इसका आदर्श और दर्शन क्या है ) अक्सर इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। कई सवाल सचमुच जिज्ञाशा का पुट लिए होते हैं और कई बार इसे शरारती अंदाज में भी पूछा जाता है, कि गोया तुम्हारा तो कोई धर्मग्रंथ ही नहीं है, इसे कैसे धर्म का नाम देते हो ? तो यह ध्यान आता है कि इसकी तुलना और कसौटी किन्हीं पोथी पर आधारित धर्मों के सदृष्य बिन्दुवार की जाए। सच कहा जाए तो गोंडी एक धर्म से अधिक आदिवासियों के जीने की पद्धति है जिसमें लोक व्यवहार के साथ पारलौकिक आध्यमिकता या आध्यात्म भी जुडा हुआ है। आत्म और परआत्मा या परम आत्म की आराधना लोक जीवन से इतर न होकर लोक और सामाजिक जीवन का ही एक भाग है। धर्म यहॉं अलग से विशेष आयोजित कर्मकांडी...