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"गोन्डवाना का गोन्दोला"


गोन्ड, गोन्दोला का आधार है , गोन्ड एक समूह है । जिसकी गोन्दोला दर्शन की तरह ही गोन्डी सहित अन्य भाषाओं का समूह है जिसे भाषा विज्ञानी "द्रविण भाषा परिवार" मानते हैं । इसी तरह देश में रूढी और परम्परा में समान व्यवहार तथा धार्मिक क्रियकलापो में प्रकृतिवादी दर्शन का अनुसरण करने वाली तथा आज की जाति व्यवस्था का शिकार अनेक जातियाँ जिन्हें विशेष सन्वैधानिक लाभ से वंचित होना पड़े, क्या ये गोन्दोला का हिस्सा नही है ? गोन्दोला का गोड इन वन्चित जातियों के सन्वैधानिक अधिकारो के पक्ष में अपनी निश्पक्ष भूमिका अदा कर रहा है ? यदि नहीं कर रहा है तो वह अपने गोन्ड समूह के गोन्दोला के मूल दर्शन का अनुगामी नहीं है। उसे अपने गोन्दोला के अन्दर आने वाले हर जाति के हित मे एक दूसरे से कन्धे से कन्धा मिलाकर साथ देना होगा । यदि गोन्दोला का एक छोटा सा हिस्सा भी पीडित है तो गोन्दोला समूह की पीड़ा होनी चाहिये । देश के जिन राज्यों में गोन्दोला समूह सन्वैधानिक अधिकारों से वंचित है उनका सदैव साथ देना गोन्दोला समूह का दायित्व है , तभी हम गोन्डवाना के आदर्श को स्थापित कर पायेंगे ।-gsmarkam

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"मरकाम गोत्र के टोटम सम्बन्धी किवदन्ती"

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