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"तानाशाही सत्ता के विरूद्ध चहुंमुखी हमला हो"

"तानाशाही सत्ता के विरूद्ध चहुंमुखी हमला हो"
देश की व्यवस्था लगातार बिगडती जा रही है । भारत देश के पूंजीपतियों की पूंजी विदेशों की अर्थव्यवस्था को संवार रही है । पूंजीपतियो के आलीशान भवन और एडवांस टेक्नॉलाजी के कल कारखाने विदेशी नागरिकों को रोजगार मुहैया कर रहे है । विदेशी सरकारें प्रवासियों को बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं ! क्या भारत देश के खनिज और प्राक्रतिक संसाधन विदेशों को विकसित करने के लिये बने हैं ? जरा सोचो आज का सत्ताधारी सत्ता के मद में अंग्रेजी सरकार की तरह वर्ताव करने लगी है । मानव हित और मूलनिवासियों के हित मे बने संविधान के कानूनों में लगातार छेडखानी की जाने लगी है । मूलनिवासियों की लगातार जागरूकता के कारण, सत्ता जाने के भय से तानाशाही रवैया अपनाने लगी है । इसलिये देश के मूलनिवासियों को व्यवस्था परिवर्तन के लिये सम्पूर्ण क्रांति के शंखनाद की आवश्यकता है । अत: आईये देश के सभी मूलनिवासी संगठन बिना कोई भेदभाव के समग्र क्रॉति का प्रथम संखनाद करते हुए १ अप्रेल से संसद घेराव तथा २अप्रेल २०१८ को भारत बंद करके आजादी की लडाई का नींव रखें -gsmarkam

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"मरकाम गोत्र के टोटम सम्बन्धी किवदन्ती"

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गोंडी धर्म क्या है

                                          गोंडी धर्म क्या है   गोंडी धर्म क्या है ( यह दूसरे धर्मों से किन मायनों में जुदा है , इसका आदर्श और दर्शन क्या है ) अक्सर इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। कई सवाल सचमुच जिज्ञाशा का पुट लिए होते हैं और कई बार इसे शरारती अंदाज में भी पूछा जाता है, कि गोया तुम्हारा तो कोई धर्मग्रंथ ही नहीं है, इसे कैसे धर्म का नाम देते हो ? तो यह ध्यान आता है कि इसकी तुलना और कसौटी किन्हीं पोथी पर आधारित धर्मों के सदृष्य बिन्दुवार की जाए। सच कहा जाए तो गोंडी एक धर्म से अधिक आदिवासियों के जीने की पद्धति है जिसमें लोक व्यवहार के साथ पारलौकिक आध्यमिकता या आध्यात्म भी जुडा हुआ है। आत्म और परआत्मा या परम आत्म की आराधना लोक जीवन से इतर न होकर लोक और सामाजिक जीवन का ही एक भाग है। धर्म यहॉं अलग से विशेष आयोजित कर्मकांडी...