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आर एस एस और आदिवासी


‌वर्तमान परिस्थितियों में हममें भी
‌कट्टर संघ या भाजपा का समर्थक की तरह कुटिल बौद्धिक हो जाना चाहिए,जब समय और परिस्थितियां देखकर दुश्मन आपके हित की भाषा बोलने लगे तो अपने मे भी इतनी चालाकी और समझदारी होना चाहिए की हमें भी उनका जवाब उन्हीं की तरीके से देकर अपने पक्ष को उनका साथ लेकर या उनकी कथित भावनाओं को देखकर उनके साथ  में दिखाना चाहिए जैसा वे करते हैं वैसा हम भी करके वातावरण को बैलेंस किया जा सकता है ,फिर अपनी बात को प्रमुखता से रखते हुए उसे महत्वपूर्ण बनाकर देश की जनता का विश्वास अर्जित किया जा सकता है-gsmarkam

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