"दिल्ली का परिणाम और आगामी विधानसभा चुनाव"
बिहार और बंगाल जैसे बड़े राज्यों को जीतने के लिये भाजपा ने दिल्ली में केजरीवाल के साथ "ईवीएम घुटाला" नहीं किया ताकि जनता के मन में विश्वास हो जाये कि ईवीएम में गड़बड़ी नहीं की जा सकती, इस बात को प्रचारित किया जायेगा कि यदि ऐसा होता तो केजरीवाल दिल्ली में हार जाता ! परन्तु आपको बता दूं भाजपा के लिए यह राज्य इतना महत्त्वपूर्ण नहीं था कारण कि यह केंद्र शासित प्रदेश है जहां की पुलिस प्रशासन और प्रशासनिक तंत्र केंद्र सरकार के अंडर रहती है। साथ ही इस महानगर निगम में भाजपा का कब्जा है, मनुवादी जय श्रीराम का स्थान जय बजरंगबली ने ले लिया। इसलिए कोई परेशानी नहीं।
यदि बिहार और बंगाल के लोग ईवीएम को क्लीन चिट देने की गलतफहमी पालते हैं तो, यहां भाजपा पूर्ण बहुमत में आकर यह साबित करने में सफल हो जायगी कि जनमत हमारे साथ है। जनता हमारे हर फैसले से संतुष्ट है। मूलनिवासी सावधान, ईवीएम आपके लिए सदैव खतरे की घंटी है।
(गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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