"आदिवासी आगे आएगा तभी देश का संविधान बचेगा"
पहले आरक्षण में प्रमोशन को रोकने की बात होगी इसके बाद समान नागरिक संहिता की बात होगी "समान नागरिक संहिता" की हवा बनाने के बाद आरक्षण को समाप्त करने की बात होगी यह सब संसद नहीं करेगा । इनडायरेक्ट में सुप्रीम कोर्ट के 99 परसेंट मनुवादी न्यायाधीशों के माध्यम से की जाएगी अब एसटी/एससी ओबीसी को रिजर्वेशन के मामले में एनआरसी /सी ए ए की तरह राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा और सुप्रीम कोर्ट को चैलेंज करना पड़ेगा "सुप्रीम कोर्ट" इस देश के आम नागरिक के साथ साथ आदिवासी से बड़ी कोई "हाई अथॉरिटी" नहीं जो इस देश के मूल वंशजों "ऑनर ऑफ इंडिया" को किनारे करके अपनी मनमानी कर सके।
( गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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