"विनम्र निवेदन"
सगा जनों हमने गोंडी भाषा में संवाद करने के लिए वाटएट में "गोंडी पारसी वनकाट ग्रुप" बनाया है जिन साथियों को यह भाषा आती है ऐसे मित्र ही इस ग्रुप में शामिल हों। इस ग्रुप में सदस्यों से संवाद होगा यह संवाद और ग्रुप में भेजी गई जानकारी को एकत्र किया जायेगा । ताकि भाषा को गूगल माइक्रोसाॅफ्ट के माध्यम से अन्य भाषाओं में ट्रास्लैशन हो सके। आपके एंड्रायड फोन में भी आसानी से किया जा सके। माननीय सुभ्रांसु जी के सहयोग से इस कार्य को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अतः इसमें अपेक्षित सहयोग प्रदान करें। भाषा में चैट नहीं करने वाले किसी साथी को यदि बिना जाने जोड़ लिया गया है तो एडमिन उसे ससम्मान रिमूव कर दे। रिमूव होने वाला भी नाराज ना हो। साथियों ऐसा निवेदन हम भाषा के बड़े मकसद के लिए कर रहे हैं। कृपया सहयोग दें।
(गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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