"एसी भारत सरकार"(श्री केसरी सिंह जी) एवं "अंतर्राष्ट्रीय मांझी सरकार" (श्री कंगला मांझी जी)"
हमारे देश में युवा पीढ़ी और अन्य बौद्धिक वर्ग तथा विभिन्न संगठनों के माध्यम से समुदाय और समाज हित में आंदोलन चलाने वाले संगठनों के जिम्मेदार लोग पदाधिकारी गण कृपया निम्नलिखित संगठन भी हमारे अपने हैं परन्तु ये दोनों संगठन जो भारत के "क्राउन और ताज" की बात करते हैं। उनसे बात करना होगा हकीकत से रूबरू होना पड़ेगा दोनों सरकारों से अनुरोध है कि
गुजरात से "ए/सी भारत सरकार" कुटुंब परिवार के जिम्मेदार लोग और मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ से अंतरर्राष्ट्रीय "कंगला मांझी सरकार" के प्रमुख जिम्मेदार लोग आपस मैं एक साथ बैठकर संगोष्ठी करें।कि भारत में हमारी (आदिवासियों) भूमिका क्या है।
नोट:-कुछ इसी तरह के विचारों को लेकर झारखंड राज्य में "टाना भगत समूह" भी है। उनसे भी मिलकर विमर्श किया जाय। यह सबकी जिम्मेदारी है।
(गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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