"प्रदेश में गोंसक्रांआं को मुख्य भूमिका में आना होगा"
प्रदेश में जल्द से जल्द गोंसक्रांआं के प्रदेश संयोजक और जिला संयोजक की नियुक्ति की जाए ताकि वे आंदोलन की विचारधारा के सभी घटकों के बीच समन्वय स्थापित कर सके। अन्यथा जाति समुदाय और समाज के नाम पर बने पंजीकृत अपंजीकृत संगठन अपनी डफली अपना राग अलापने में लगे रहेंगे। इसमें समुदाय और समाज का नुक़सान हो सकता है। संयोजक का चयन ऐसा हो कि वह सभी के बीच समन्वय बना सके। जनजाति है तो जनजाति की वर्गीय मानसिकता विकसित कर सके। अनुसूचित जाति है तो वह उसमें भी वर्गीय मानसिकता भर सके। यही बात अन्य पिछडी जातियों के संगठनों के लिए भी लागू कर सकते हैं।तभी मनुवाद से निपटा जा सकता है,अन्यथा, मनुवाद के विरुद्ध चल रहे आंदोलनों की सफलता में प्रश्नचिन्ह लगता है।
(गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)
0."देशज त्यौहारों की वर्तमान स्थिति" यह तो तय है कि होलिका को दुश्मनों ने चोरी से रात में मारकर जलाया होगा जिसकी यादो को ताजा बनाये रखने के लिए उन्हें किसी ना किसी देशज खुशी के त्यौहार के बीच रन्ग में भन्ग करना था। वे धीरे धीरे सफल हुए। सत्ता के हमारी मान्यताओं पर पडे प्रतिकूल प्रभाव से हम अपने त्यौहार को भूलते गये। इन्होंने हमारे हर त्यौहार के साथ अपना कोई ना कोई त्यौहार जोडकर हमारी सन्सक्रति को विस्मृत करने का प्रयास किया है, इसे समझना होगा। हमारे लोगों के द्वारा इन विषयों पर किया जा रहा शोध प्रयास सराहनीय है। हमें बहुजन आन्दोलन के अग्रणी मा० काशीराम के १५/८५ के फार्मूला से आर्य संस्कृति /अनार्य सन्सक्रति की मान्यताओं, परम्पराओं तीज त्यौहारों को छान्ट कर अलग करना होगा अन्यथा जाने अनजाने में हम अपनी खुशी के दिन को मातम के तथा अपने मातम के समय में खुशी मनाते दिखेन्गे । (गुलजार सिंह मरकाम) 1. "सान्सक्रतिक सन्घर्श में शोसल मीडिया का योगदान" बड़ी खुशी की बात है कि होली के सम्बन्ध में सोशल मीडिया में देश का पढा लिखा मूलनिवासी वर्ग देशज विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर...
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