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"गोंडवाना के आदिवासी मैं यदि अहिंदू की मानसिकता परिपक्व है तो भाजपा के हिंदुत्व रथ को रोका जा सकता है"

"गोंडवाना के आदिवासी मैं यदि अहिंदू की मानसिकता परिपक्व है तो भाजपा के हिंदुत्व रथ को रोका जा सकता है"
गोडवाना का आदिवासी यदि अहिंदू के रूप से एकजुट होता है तो उसका लाभ विधानसभा चुनाव मैं कुछ इस तरह मिलेगा। भाजपा के हिंदुत्व की लहर को अहिंदू आदिवासी ही रोक सकता है।
जनजातियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों में हिंदू और अहिंदू आदिवासी का जनगणना 2021 के पूर्व सर्वे कर लिया जाए। यह सर्वे विधानसभा चुनाव २०१८ के पूर्व कर लिया जाए तो और भी उत्तम है, कारण की हिंदू आदिवासी खुलकर भाजपा को वोट देगा। अहिंदू आदिवासी ,गोन्डवाना का सहयोगी होगा। आरक्षित सीटों में अपने आप को अहिंदू मानने वाला आदिवासी यदि एकता दिखाता है, तो अंबेडकरवादी अनुसूचित जाति गोन्डवाना को सहयोग करेगा तथा गैर अंबेडकरवादी अनुसूचित जाति ,कांग्रेस या भाजपा को मदद करेगा । इसी तरह महात्मा फुले, साहूजी महाराज, अंबेडकर की विचारधारा को मानने वाला पिछड़ा वर्ग इन क्षेत्रों में गोन्डवाना को वोट करेगा परंतु महात्मा फुले, साहूजी महाराज अंबेडकर की विचारधारा को नहीं समझने वाला पिछड़ा वर्ग भाजपा, कांग्रेस को वोट करेगा। देश का अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम समुदाय जो अंबेडकर मिशन से प्रभावित है ,आदिवासी क्षेत्रों में गोन्डवाना को वोट करेगा बाकी कांग्रेस को ,हर चुनाव में ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय का रुख कांग्रेस की ओर होता है परंतु आदिवासी क्षेत्र में आदिवासी एकता लहर पैदा हो गई तो सारा अल्पसंख्यक समुदाय गोन्डवाना को वोट करेगा । यही सच और यही हकीकत है।-Gsmarkam

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