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प्राण वायु आक्सीजन पैदा करने का ठेका क्या भारत ने ही लिया है ।

"ये कैसा समझौता"
प्राण वायु आक्सीजन पैदा करने का ठेका क्या भारत ने ही लिया है ।
विश्व में औदयोगिक विकास के नाम पर प्रदूषण लगातार बढ रहा है । ओजोन परत में छेद हो चुके हैं जिसकी तीखी गर्मी से सब झुलस रहे हैं । तब विश्व के सभी देशों की जिम्मेदारी बनती है कि अपने अपने देशों में पेड उगायें । पर अमरीका जैसा देश कहता है कि हम अपना कार्य जारी रखेगे । हमसे पैसे ले जाओ और अपनी जमीन में पेड उगाकर पर्यावरण में प्राणवायु का संचार करो पैसे की चिंता मत करो जितना लगे हमसे लो । अब भारतीय व्यवस्था के संचालक इस काम में जुट गये हैं । सारी जमीन में वृक्षारोपड करने पर तुले हैं राजस्व तक की जमीन जो किसानी के लिये है, उस पर भी पेड लगाकर कहीं कहीं तो नागरिकों के खाते की भूमि को वन भूमि बनाकर पेड उगा रहे हैं । हमारे देश के लोग पेड लगाने से ज्यादा आय प्राप्ति के चक्कर में अपनी जमीनों का कृषि रकबा कम कर रहे हैं । क्या इन्हें पता है कि भविष्य में कृषि रकबा कम होने से खदयान की कमी होगी तब हमें अमरीका ,जापान आदि देशों से खादयान के लिये अब से ज्यादा अश्रित होना पडेगा ।

हमारे लगाये पेडों को काटने के लिये परमीशन लेना पडेगा जो कभी नहीं मिलेगा । जैसे आज नहीं मिलता । हम और हमारा देश हर तरफ से परआश्रित हो जायेगा जग की भलाई करने में । क्या हम भूखे रहकर दुनिया के लिये आक्सीजन पैदा करने का ठेका ले रखे हैं । यह कैसा अंतर्राष्ट्रीय समझौता है ।-gsmarkam

"सुधार रास्ता है, नैसर्गिक आनंद मंजिल है ।"
हमें भारतीय संविधान का सम्मान करना चाहिये क्योकि इसमें बिगडैलों, गैरबराबरी के पक्षधरों को सुधारने का रास्ता बना हुआ है इस रास्ते का उल्लंघन करने वालों को हर कानून में दण्ड का प्रावधान है । पर हमारा संविधान केवल सुधार तक नहीं रूक जाता,उसकी मंजिल स्वस्थ्य लोकतंत्र की स्थापना है, इसलिये संविधान में 5 वीं एवं 6 वीं अनुसूचि जैसे प्रावधान को समाहित कर अधिसूचित क्षेत्र घोषित कर स्वस्थ्य लोकतंत्र की पाठशाला के रूप में विकसित करने का प्रयास किया है ।-gsmarkam

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